वासना बडी छिनाल । फि
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वासना बडी छिनाल । फिरती चारोराज ।
मेरी बात सुनती नहि । बहुत किये हैरान ॥
एक दिन मै पडि हात । दीओ पेडु परळात ।
शरण आयी पेट मे । निकली दाढी पकडी हात ॥
बिगिटिगिना खेलुंगी सुनोतु मारी बात ।
धती हमारा खुसी हुआ बडी किये शामत ॥
कहे बोधला रजात लब दिये हमार हात ॥
