सखी री,
42.
सखी री,
सखी री म्हाने लागी लगन गिरधर की ।
दिन नहि चैन, रैन नहि निद्रा,
प्रीत लगी सांवरिया की ।
नैनन नीर बहत दिनराती,
मन मे छवि गिरधर की ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
दासी भई मै तेरी ।
42.
सखी री,
सखी री म्हाने लागी लगन गिरधर की ।
दिन नहि चैन, रैन नहि निद्रा,
प्रीत लगी सांवरिया की ।
नैनन नीर बहत दिनराती,
मन मे छवि गिरधर की ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
दासी भई मै तेरी ।