होरी खेलत है गिरधारी
22.
होरी खेलत है गिरधारी ।
मुरली चंग बजत डफ न्यारो ।
संग जुबती ब्रजनारी ॥
चंदन केसर छिड़कत मोहन
अपने हाथ बिहारी ।
भरि भरि मूठ गुलाल लाल संग
स्यामा प्राण पियारी ।
गावत चार धमार राग तहं
दै दै कल करतारी ॥
फाग जु खेलत रसिक सांवरो
बाढ्यौ रस ब्रज भारी ।
मिरा कू प्रभु गिरधर मिलिया
मोहनलाल बिहारी ॥
