पग घूँघरू बाँध मिरा
7.
पग घूँघरू बाँध मिरा नाची रे ।
मै तो मेरे नारायण की आपहि हो गई दासी रे ।
लोग कहै मिरा भई बावरी न्यात कहै कुलनासी रे॥
विष का प्याला राणाजी भेज्या पीवत मिरा हाँसी रे ।
'मिरा' के प्रभु गिरिधर नागर सहज मिले अविनासी रे॥
7.
पग घूँघरू बाँध मिरा नाची रे ।
मै तो मेरे नारायण की आपहि हो गई दासी रे ।
लोग कहै मिरा भई बावरी न्यात कहै कुलनासी रे॥
विष का प्याला राणाजी भेज्या पीवत मिरा हाँसी रे ।
'मिरा' के प्रभु गिरिधर नागर सहज मिले अविनासी रे॥