राग धानी
135.
राग धानी
मोहि लागी लगन गुरुचरणन की ।
चरण बिना कछुवै नाहि भावै, जगमाया सब सपननकी॥
भौसागर सब सूख गयो है, फिकर नाहि मोहि तरननकी ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर आस वही गुरू सरननकी॥
135.
राग धानी
मोहि लागी लगन गुरुचरणन की ।
चरण बिना कछुवै नाहि भावै, जगमाया सब सपननकी॥
भौसागर सब सूख गयो है, फिकर नाहि मोहि तरननकी ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर आस वही गुरू सरननकी॥