नातो नामको जी म्हांस
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नातो नामको जी म्हांसू तनक न तोड्यो जाय॥
पाना ज्यू पीली पड़ी रे, लोग कहै पिंड रोग ।
छाने लांघण म्है किया रे, राम मिलण के जोग॥
बाबल बैद बुलाइया रे, पकड़ दिखाई म्हांरी बांह ।
मूरख बैद मरम नहि जाणे, कसक कलेजे मांह॥
जा बैदां, घर आपणे रे, म्हांरो नांव न लेय ।
मै तो दाझी बिरहकी रे, तू काहेकू दारू देय॥
मांस गल गल छीजिया रे, करक रह्या गल आहि ।
आंगलिया री मूदड़ी म्हारे आवण लागी बांहि॥
रह रह पापी पपीहडा रे,पिवको नाम न लेय ।
जै कोई बिरहण साम्हले तो, पिव कारण जिव देय॥
खिण मंदिर खिण आंगणे रे, खिण खिण ठाड़ी होय ।
घायल ज्यू घूमू खड़ी, म्हारी बिथा न बूझै कोय॥
काढ़ कलेजो मै धरू रे, कागा तू ले जाय ।
ज्या देसा म्हारो पिव बसै रे, वे देखै तू खाय॥
म्हांरे नातो नांवको रे, और न नातो कोय ।
मिरा ब्याकुल बिरहणी रे, हरि दरसण दीजो मोय॥
