नाथ तुम जानतहो सब घट
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नाथ तुम जानतहो सब घटकी, मिरा भक्ति करे प्रगटकी॥धृ०॥
ध्यान धरी प्रभु मिरा संभारे पूजा करे अट पटकी ।
शालिग्रामकू चंदन चढत है भाल तिलक बिच बिंदकी॥१॥
राम मंदिरमे नाचे ताल बजावे चपटी ।
पाऊमे नेपुर रुमझुम बाजे । लाज संभार गुंगटकी॥२॥
झेर कटोरा राणाजिये भेज्या संत संगत मिरा अटकी ।
ले चरणामृत मिराये पिधु होगइे अमृत बटकी॥३॥
सुरत डोरी पर मिरा नाचे शिरपे घडा उपर मटकी ।
मिरा के प्रभु गिरिधर नागर सुरति लगी जै श्रीनटकी॥४॥
