वाया का भ्रमसी उपास
142.
वाया का भ्रमसी उपास करिसी कंदेमुळे सेविसी ।
भस्मा उद्धरिसी कपाटि रिघसी पंचाग्नी पै साधिसी॥
भूमीसी निजसी वनी विचरसी मिथ्या तनू आटिसी ।
आत्मा नोळखिसी म्हणे रे बहेणि मोक्षासि कै पावसी॥
142.
वाया का भ्रमसी उपास करिसी कंदेमुळे सेविसी ।
भस्मा उद्धरिसी कपाटि रिघसी पंचाग्नी पै साधिसी॥
भूमीसी निजसी वनी विचरसी मिथ्या तनू आटिसी ।
आत्मा नोळखिसी म्हणे रे बहेणि मोक्षासि कै पावसी॥