वारकरी रोजनिशी

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जय भगवद् गीते, जय भग

🙏 1. भजनी मालिका 2026 · ABH-090286 · अभंग क्र. ८

8.
जय भगवद् गीते, जय भगवद् गीते २

जय भगवद् गीते,
जय भगवद् गीते ।
हरि-हिय-कमल-विहारिणि,
सुन्दर सुपुनीते ॥

कर्म-सुमर्म-प्रकाशिनि,
कामासक्तिहरा ।
तत्त्वज्ञान-विकाशिनि,
विद्या ब्रह्म परा ॥ जय ॥

निश्चल-भक्ति-विधायिनि,
निर्मल मलहारी ।
शरण-सहस्य-प्रदायिनि,
सब विधि सुखकारी ॥ जय ॥

राग-द्वेष-विदारिणि,
कारिणि मोद सदा ।
भव-भय-हारिणि तारिणि,
परमानन्दप्रदा ॥ जय॥

आसुर-भाव-विनाशिनि,
नाशिनि तम रजनी ।
दैवी सद् गुणदायिनि,
हरि-रसिका सजनी ॥ जय ॥

समता, त्याग सिखावनि,
हरि-मुख की बानी ।
सकल शास्त्र की स्वामिनी,
श्रुतियों की रानी ॥ जय ॥

दया-सुधा बरसावनि,
मातु ! कृपा कीजै
हरिपद-प्रेम दान कर,
अपनो कर लीजै ॥ जय ॥

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