संत मिराबाई अभंग - र
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संत मिराबाई अभंग - रचना
नहि भावै थांरो देसड़लो जी रंगरूड़ो॥
थांरा देसा मे राणा साध नही छै, लोग बसे सब कूड़ो ।
गहणा गांठी राणा हम सब त्यागा, त्याग्यो कररो चूड़ो॥
काजल टीकी हम सब त्याग्या, त्याग्यो है बांधन जूड़ो ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर बर पायो छै रूड़ो॥
राग खम्माच
