कल नाहि पड़त जिस,
21.
कल नाहि पड़त जिस,
हरि बिन कल नाहि पड़त जिस ।
तुम बिन मोरे प्राण अधार,
एक घड़ी नहि सरत ।
तुम बिन मेरो को है सांवरिया,
तुम बिन कौन खबर लेत ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
दरसन दीजै हेत ।
21.
कल नाहि पड़त जिस,
हरि बिन कल नाहि पड़त जिस ।
तुम बिन मोरे प्राण अधार,
एक घड़ी नहि सरत ।
तुम बिन मेरो को है सांवरिया,
तुम बिन कौन खबर लेत ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
दरसन दीजै हेत ।