पहाहो कडकडिले गगनी |
513.
पहाहो कडकडिले गगनी | भेणे कांपते मेदिनी ॥१॥
तो देव दैत्या अंतकु | होय भक्तांसी पाळकु ॥२॥
भोजे प्रल्हाद नाचतु | नामया स्वामी रे अनंतु ॥३॥
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पहाहो कडकडिले गगनी | भेणे कांपते मेदिनी ॥१॥
तो देव दैत्या अंतकु | होय भक्तांसी पाळकु ॥२॥
भोजे प्रल्हाद नाचतु | नामया स्वामी रे अनंतु ॥३॥