तुम की करो या हू ज्य
95.
तुम की करो या हू ज्यानी । तुम०॥धृ०॥
ब्रिंद्राजी बनके कुंजगलीनमो । गोधनकी चरैया हू ज्यानी॥१॥
मोर मुगुट पीतांबर सोभे । मुरलीकी बजैया हू ज्यानी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । दान दिन ले तब लै हु ज्यानी॥३॥
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तुम की करो या हू ज्यानी । तुम०॥धृ०॥
ब्रिंद्राजी बनके कुंजगलीनमो । गोधनकी चरैया हू ज्यानी॥१॥
मोर मुगुट पीतांबर सोभे । मुरलीकी बजैया हू ज्यानी॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । दान दिन ले तब लै हु ज्यानी॥३॥