जो राज दे तब कबन बढा
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जो राज दे तब कबन बढाई । जो भीक मंगावे तव क्या घटा जाई ॥१॥
तू हर भज मन मेरे पद निर्बाना । बहूर न होये तेरा आबज जोना ॥२॥
सब ते उपाई परम पुलाई । जिस तू देवे तिसे भुजाई ॥३॥
सतगुरू मिले तब संसार जाई । किसहू पुजू दुजा नजर न आई ॥४॥
एके पाथर किजे भाव । दुजे पाथर धरिये पाव ॥५॥
जे वह देवतो हमबी देव । कहे नामदेव हम हरीकी सेव ॥६॥
