मोके तारले रामा तारल
९७.
मोके तारले रामा तारले । मै अजान जन तर बिन जानो बाप बिठला बाह दे । नरदेह सुर होई ॥१॥
जात निमखमे सत्गुरु बुध सिखलाई । नरते उपज स्वरगको जीत्यो सो ओखद मै पाई ॥ध्रु०॥
जहा जहा ध्रुव नारद टेके नेक टकावो मोही । तेरे नाम अब लंब बहुत है नामेकी निजमत एही ॥२॥
मोह लाभती ताला बेली । बछरे बिन गाय अकेली ॥३॥
पानीया बिन मीन तलफे ऐसे राम नाम बिन बापरो नामा ॥४॥
जैसे गायका बाछा छुटका । थान चोखत माखन घुटका ॥५॥
नामदेव नारायण पाया । गुरु भेटत अलख लखाया ॥६॥
जैसे विखे हेतपर नारी । ऐसे नामे प्रीत मुरारी ॥७॥
जैसे तापते निर्मल घामा । तैसे राम नामबिन बापरो नामा ॥८॥
