करिना साधन जीवासी बं
1872.
करिना साधन जीवासी बंधन | कोणे काळी मन नोहे शुद्ध ॥१॥
करू जाता तप अभिमानरूप | त्रिविधादि ताप कैसा निवे ॥२॥
नित्यानित्य करी विवेक आपण | तेणे अभिमान वाढतसे ॥३॥
नामा म्हणे जन्म विसरोनिया गेलो | मरोनि राहिलो देहातीत ॥४॥
1872.
करिना साधन जीवासी बंधन | कोणे काळी मन नोहे शुद्ध ॥१॥
करू जाता तप अभिमानरूप | त्रिविधादि ताप कैसा निवे ॥२॥
नित्यानित्य करी विवेक आपण | तेणे अभिमान वाढतसे ॥३॥
नामा म्हणे जन्म विसरोनिया गेलो | मरोनि राहिलो देहातीत ॥४॥