बसो मोरे नैनन मे नंद
144.
बसो मोरे नैनन मे नंदलाल ।
मोहनी मूरति सांवरि सूरति, नैणा बने बिसाल ।
अधर सुधारस मुरली राजत, उर बैजंती-माल ॥
छुद्र घंटिका कटि तट सोभित, नूपुर सबद रसाल ।
मिरा प्रभु संतन सुखदाई, भगत बछल गोपाल ॥
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बसो मोरे नैनन मे नंदलाल ।
मोहनी मूरति सांवरि सूरति, नैणा बने बिसाल ।
अधर सुधारस मुरली राजत, उर बैजंती-माल ॥
छुद्र घंटिका कटि तट सोभित, नूपुर सबद रसाल ।
मिरा प्रभु संतन सुखदाई, भगत बछल गोपाल ॥