नैना निपट बंकट छबि अ
3.
नैना निपट बंकट छबि अटके ।
देखत रूप मदनमोहन को, पियत पियूख न मटके ।
बारिज भवाँ अलक टेढी मनौ, अति सुगंध रस अटके॥
टेढी कटि, टेढी कर मुरली, टेढी पाग लट लटके ।
'मिरा प्रभु के रूप लुभानी, गिरिधर नागर नट के॥
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नैना निपट बंकट छबि अटके ।
देखत रूप मदनमोहन को, पियत पियूख न मटके ।
बारिज भवाँ अलक टेढी मनौ, अति सुगंध रस अटके॥
टेढी कटि, टेढी कर मुरली, टेढी पाग लट लटके ।
'मिरा प्रभु के रूप लुभानी, गिरिधर नागर नट के॥