पिहुकी बोलिन बोल, पप
209.
पिहुकी बोलिन बोल, पपैया ॥टेक ॥तै खोलना मेरा जी डरत है । तन मन डांवा डोल ॥पपैया ॥१॥
तारे बिना मोकु पीर आवत है । जियरा करूंगी मै मोल ॥२॥
मिरके प्रभु गिरिधर नागर । कामनी करत कलोल ॥३॥
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पिहुकी बोलिन बोल, पपैया ॥टेक ॥तै खोलना मेरा जी डरत है । तन मन डांवा डोल ॥पपैया ॥१॥
तारे बिना मोकु पीर आवत है । जियरा करूंगी मै मोल ॥२॥
मिरके प्रभु गिरिधर नागर । कामनी करत कलोल ॥३॥