भूली भटकी आई कान्हा
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भूली भटकी आई कान्हा तोरे गांवछे । मारो नंदनंदन चित्त जडे तोरे पावछे लालना ॥१॥
चली आई परपंच हाटसे । तुं केव धरियों मेरे वाटछे ॥२॥
आब तू नंदनंदन लालछे । मै गारी देऊं तुजसे लालना ॥३॥
एका जनार्दन नाम तोरे गावछे । पीरीत वसे तारे चरणछे लालना ॥४॥
