हो भलो तुम नंदन लालछ
95.
हो भलो तुम नंदन लालछे । मुजे गांवढी बतावछे ॥१॥
आगल पिछिल ध्यानमें आवछे । मंगल नाम तोरा मे गावछे ॥२॥
तरो सुंदर रुप मोरे मनछे । प्रीत लगी कान्हा हमछे ॥३॥
एक जनार्दनी तोरे नामछे । गावत ध्यावत हृदयमेछे ॥४॥
95.
हो भलो तुम नंदन लालछे । मुजे गांवढी बतावछे ॥१॥
आगल पिछिल ध्यानमें आवछे । मंगल नाम तोरा मे गावछे ॥२॥
तरो सुंदर रुप मोरे मनछे । प्रीत लगी कान्हा हमछे ॥३॥
एक जनार्दनी तोरे नामछे । गावत ध्यावत हृदयमेछे ॥४॥