गांजा पीनेवाला जन्मक
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गांजा पीनेवाला जन्मको लहरीरे॥धृ०॥
स्मशानावासी भूषणे भयंकर । पागट जटा शीरीरे॥१॥
व्याघ्रकडासन आसन जयाचे । भस्म दीगांबरधारीरे॥२॥
त्रितिय नेत्री अग्नि दुर्धर । विष हे प्राशन करीरे॥३॥
मिरा कहे प्रभू ध्यानी निरंतर । चरण कमलकी प्यारीरे॥४॥
