तुम्हरे कारण सब छोड्
73.
तुम्हरे कारण सब छोड्या, अब मोहि क्यू तरसावौ हौ ।
बिरह-बिथा लागी उर अंतर, सो तुम आय बुझावौ हो॥
अब छोड़त नहि बड़ै प्रभुजी, हंसकर तुरत बुलावौ हौ ।
मिरा दासी जनम जनम की, अंग से अंग लगावौ हौ॥
73.
तुम्हरे कारण सब छोड्या, अब मोहि क्यू तरसावौ हौ ।
बिरह-बिथा लागी उर अंतर, सो तुम आय बुझावौ हो॥
अब छोड़त नहि बड़ै प्रभुजी, हंसकर तुरत बुलावौ हौ ।
मिरा दासी जनम जनम की, अंग से अंग लगावौ हौ॥