चरन रज महिमा मै जानी
67.
चरन रज महिमा मै जानी । याहि चरनसे गंगा प्रगटी ।
भगिरथ कुल तारी॥ चरण०॥१॥
याहि चरनसे बिप्र सुदामा । हरि कंचन धाम दिन्ही॥ च०॥२॥
याहि चरनसे अहिल्या उधारी । गौतम घरकी पट्टरानी॥ च०॥३॥
मिराके प्रभु गिरिधर नागर । चरनकमल से लटपटानी॥ चरण०॥४॥
