घर आवो जी सजन मिठ बो
66.
घर आवो जी सजन मिठ बोला ।
तेरे खातर सब कुछ छोड्या, काजर, तेल तमोला॥
जो नहि आवै रैन बिहावै, छिन माशा छिन तोला ।
'मिरा' के प्रभु गिरिधर नागर, कर धर रही कपोला॥
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घर आवो जी सजन मिठ बोला ।
तेरे खातर सब कुछ छोड्या, काजर, तेल तमोला॥
जो नहि आवै रैन बिहावै, छिन माशा छिन तोला ।
'मिरा' के प्रभु गिरिधर नागर, कर धर रही कपोला॥