मेरे नैना निपट बंकट
85.
मेरे नैना निपट बंकट छबि अटके॥
देखत रूप मदनमोहनको पियत पियूख न मटके ।
बारिज भवा अलक टेढ़ी मनौ अति सुगंधरस अटके॥
टेढ़ी कटि टेढ़ी कर मुरली टेढ़ी पाग लर लटके ।
मिरा प्रभु के रूप लुभानी गिरधर नागर नटके॥
85.
मेरे नैना निपट बंकट छबि अटके॥
देखत रूप मदनमोहनको पियत पियूख न मटके ।
बारिज भवा अलक टेढ़ी मनौ अति सुगंधरस अटके॥
टेढ़ी कटि टेढ़ी कर मुरली टेढ़ी पाग लर लटके ।
मिरा प्रभु के रूप लुभानी गिरधर नागर नटके॥