या मोहन के रूप लुभान
86.
या मोहन के रूप लुभानी ।
सुंदर बदन कमलदल लोचन, बांकी चितवन मंद मुसकानी॥
जमना के नीरे तीरे धेनु चरावै, बंसी मे गावै मीठी बानी ।
तन मन धन गिरधर पर बारूं, चरणकंवल मिरा लपटानी॥
86.
या मोहन के रूप लुभानी ।
सुंदर बदन कमलदल लोचन, बांकी चितवन मंद मुसकानी॥
जमना के नीरे तीरे धेनु चरावै, बंसी मे गावै मीठी बानी ।
तन मन धन गिरधर पर बारूं, चरणकंवल मिरा लपटानी॥