हरि गुन गावत नाचुंगी
2.
हरि गुन गावत नाचुंगी ॥धृ॥
अपने मंदिरमो बैठ बैठकर । गींता भागवत बांचुगी ॥१॥
ग्यान ध्यानकी गठडी बांधकर । हरिहर संग मै लागूंगी ॥२॥
मीराके प्रभु गिरिधर नागर । सदा प्रेमरस चाखुंगी ॥३॥
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हरि गुन गावत नाचुंगी ॥धृ॥
अपने मंदिरमो बैठ बैठकर । गींता भागवत बांचुगी ॥१॥
ग्यान ध्यानकी गठडी बांधकर । हरिहर संग मै लागूंगी ॥२॥
मीराके प्रभु गिरिधर नागर । सदा प्रेमरस चाखुंगी ॥३॥