झुलत राधा संग । गिरध
3.
झुलत राधा संग । गिरधर झुलत राधा संग ॥धृ॥
अबिर गुलालकी धूम मचाई । भर पिचकारी रंग ॥१॥
लालभाई बिंद्राबन जमुना । केशर चूवत रंग ॥२॥
नाचत ताल अधार सुरभर । धिमी धिमी बाजे मृदंग ॥३॥
मीरके प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमलकु दंग ॥४॥
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झुलत राधा संग । गिरधर झुलत राधा संग ॥धृ॥
अबिर गुलालकी धूम मचाई । भर पिचकारी रंग ॥१॥
लालभाई बिंद्राबन जमुना । केशर चूवत रंग ॥२॥
नाचत ताल अधार सुरभर । धिमी धिमी बाजे मृदंग ॥३॥
मीरके प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमलकु दंग ॥४॥