नमोजि विश्वतीता।
3.
नमोजि विश्वतीता।
विश्रवव्यापका श्रीअनंता।
परात्परा सद्गुरुनाथा।
ईश्रवरनियंता सकळादी ॥१॥
तुमचा अनुग्रहो झालिया।
निरसे मोह ममता माया।
करुनी उपदेश ब्रम्हया।
निजात्मपदी स्थापिसी ॥२॥
सनकादिकांचे चिंतन।
नाम तुमचे अनुसंधान।
त्याते स्वरुप स्थिती पावउन।
ठेविसी निमग्न निजानंदी ॥३॥
शुक्र प्रल्हाद नारद।
पावोनिया तुमचा बोध।
करिती सदा ब्रम्हानंद।
तारिती कीर्तने आणिका ॥४॥
निळा म्हणे परमानंदा।
परात्परा सच्चिदानंदा।
सद्गुरुराया निजात्मबोधा।
कृपेस्तव लाहिजे तुमाचिये ॥५॥
