वारकरी रोजनिशी

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वारकरी रोजनिशी › 5. संत एकनाथ महाराज › 1. संत एकनाथ अभंग गाथा › 1. संत एकनाथ अभंग गाथा › 271. गारुड ३९७३ ते ३९७४

सुनो संत सज्जन भाई ।

🙏 5. संत एकनाथ महाराज · ABH-090325 · अभंग क्र. ३९७४

3974.
सुनो संत सज्जन भाई । हम तोनिराकारके गारुडी आया है । हमारे उप्पर संतकीनवाई । इस कलजुगमें पैदा हुवे ॥१॥ ये देखो खेलखेलते रस्तेमे । सब आलम दुनिया देखत है । आबेचल अहां हांडीबाग । जरा प्रेमका ढोल बजावालगलग लग लग ॥२॥ पहिले तो छे साप निकालुमैदानमे । बडे बडे अजगर उसके नाम बताउ । कामक्रोध मद मत्सर दंभ अहंकार॥३॥अबे चल येसापने बडे बडेकु डंख मारा । भस्मासुर तो भसमकर दीया । पराशर तो ढीवरनके पिछेलगा । इंद्रकीतो भगाकिंत तो हो गयी काया । महादेव तोभिल्लीनके पिछे लगा । विष्णु तो वृंदा देखकरघबराया । ब्रह्मदेव तो सरस्वती पर ख्याल किया । ऐसे साप कठीण है॥४॥अ ब ब ब ब । अज्ञानकेपेटीमें भरे है । निकालु समाल वे डंख मारे गा । येहात डाला । पा डंख माराबे डंख मारा । हाय हायबडी वेदना होती है । आबी जान जाती है । तुजकोक्या बताऊं । आबी उतारनेवाला कौन बुलाऊ । सुनो मेरे पास सद्गुरुका मोहरा है । प्रेमकी बनाऊसान । बोधका बनाऊपाणी । भक्तिके डोटु दरबारमेंआबी लगाऊघसकें । तो सबी जहर उतारु ॥६॥आबी भक्ति नागीन निकालु । इस नागनसे बडेबड़े खेल खेलते थे । शुक याज्ञवल्क्य दत्तकपिलमुनी । ऐसे खेल खेलते थे ॥७॥ आबेहांडीबाग । आहाजी तेरेकु कुच याद है । हांजी येदेखो । पहिले तोमारू फुकाआबी बताऊएक एकक्या है । एक तो निराकार भगवान है । दो क्या है । ब्रह्ममें माया । माया मे ब्रह्मा तीन क्या है । तीन तोब्रह्मा, विष्णु, महेश है । चार क्या है । चार तो वेद है । पांच क्या है । पांच तो पंचभुत आत्मा है । छे क्याहै । छे तो शास्त्र है । सात क्या है । सात तोसप्तपाताल है । आठ क्या है । आठ तो आठ प्रकृतीहै । नऊ क्या है । नऊ तो नवविधा भक्ति है । दसक्या है । दस तो दस अवतार है । ग्यारा क्या है । ग्यारा तो रुद्र है । बारा क्या है । बारा तो सुर्यकाकला है । तेरा क्या है । तेरा तो कच्छापक्या राण्याहै । चवदा क्या है । चवदा तो तल है । पंधरा क्या है । पंधरा तो तिथी है । ऐसा एका जनार्दनी खेल । भक्ति पुर:सरलगाया मेल॥८॥

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