राग कोसी
92.
राग कोसी
म्हारी सुध ज्यू जानो त्यू लीजो॥
पल पल ऊभी पंथ निहारूं, दरसण म्हाने दीजो ।
मै तो हू बहु औगुणवाली, औगण सब हर लीजो॥
मै तो दासी थारे चरण कंवलकी, मिल बिछड़न मत कीजो ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर, हरि चरणा चित दीजो॥
92.
राग कोसी
म्हारी सुध ज्यू जानो त्यू लीजो॥
पल पल ऊभी पंथ निहारूं, दरसण म्हाने दीजो ।
मै तो हू बहु औगुणवाली, औगण सब हर लीजो॥
मै तो दासी थारे चरण कंवलकी, मिल बिछड़न मत कीजो ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर, हरि चरणा चित दीजो॥