॥ सिंधू नदी आरती ५ ॥
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॥ सिंधू नदी आरती ५ ॥
ॐ जय जगदानन्दी
जय सुन्धा माता, मैया जय सुन्धा माता।
चामुण्डा अज केश्वरी, सुख संपत्ति दाता।
जय सुन्धा माता॥
सुन्धा परवत बणियो, मन्दिर हद भारी।
तीन लोक में कीरत, पूजे नर नारी॥
जय सुन्धा ….
चांचिक देव तिहारो, मंदिर बणवायो।
सुन्धा परवत जग में, तीरथ कहलायो॥
जय सुन्धा ….
केसरि – वाहन राजे, चारभुजा धारी।
लाल चुनरिया चमके, शोभा है न्यारी॥
जय सुन्धा ….
चण्ड मुण्ड संहारी, चामुण्डा माता।
तेरे दर्शन से माँ, दुख दारिद्र जाता॥
जय सुन्धा ….
चौसठ योगिनी थारे, नृत्य करे भैरू।
ढोल नगाड़ा बाजे, और बाजे डमरू॥
जय सुन्धा ….
