पुढे चालिला गरूड | आ
997.
पुढे चालिला गरूड | आक्रमित अवघे ब्रह्मांड | विमान शुभ्र चंड | पुंडलिक आणितसे ॥१॥
धन्य हरिभक्तांचा मेळ | धन्य धन्य तो गोपाळ | धन्य धन्य आळंकापुरी सुढाळ |ज्ञानदेव येतसे ॥२॥
दुरोनी लक्षित रूक्मिणी | हरूषे सांगे चक्रपाणि | पैल विमान येतसे गगनी |दाखविजे नामया ॥३॥
मग नामयासी सावध | करूनिया तो गोविंद | म्हणे तुझा पुरविला रे छंद |पैल ज्ञानदेव येताहे ॥४॥
नेत्र विकसित पाहे | तंव गगनी विमान दिसताहे | पुंडलिक गरुड आहे | दिव्य देही दिव्य विमानी ॥५॥
ऐसा जंव तटस्थ घटिका | तंव उतरले निमिष्य एका | नामा पावला संतोषा |ज्ञानदेवा देखोनी ॥६॥
विमानघंटी गर्जत | नामा पुढारा चालत | जी जी रुक्मिणी म्हणत | वेगु कीजे ज्ञानदेवा ॥७॥
नामा ज्ञानदेव भेटले | पुंडलिके विष्णु नमस्कारिले | भक्ती जयजय शब्द केले |देवी पुष्पव्रुष्टि केलिया ॥८॥
