मुखरा क्या देखे दरपन
12.
मुखरा क्या देखे दरपनमो । दया धरम नही मनमो ॥धृ॥
जबलग फूल रहे फुलबाडी बास रहे निज फुलमे ।
एक दिन ऐसी हो जावेगी घाय उडेगी तनमो ॥१॥
चुवा चंदन अबिर अरगजा शोभे गोरे तनमो ।
धन जोबन डोंगरका पानी ढल जावेगा खिनमो ॥२॥
नदीया गहिरी नाव पुरानी उतार चाले संगममो ।
गुरुमुख होय सो पार उतारे नुगरा डुबे उनमो ॥३॥
कवडी कावडी माया जोडी सुरत रहे निज तनमो ।
दास दरवाजे घेरलीये जब रहगयी मनके मनमो ॥४॥
पगिया बांधे परअसवारे तेल झुला झुलपेमो ।
कहत कबीरा सुन भाई साधु ये क्या लड राहे मनमो ॥५॥
