सखी मेरी नींद नसानी
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सखी मेरी नींद नसानी हो ।
पिवको पंथ निहारत सिगरी रैण बिहानी हो ।
सखियन मिलकर सीख द मन एक न मानी हो ।
बिन देख्या कल नाहि पड़त जिय ऐसी ठानी हो ।
अंग-अंग ब्याकुल भ मुख पिय पिय बानी हो ।
अंतर बेदन बिरहकी कोई पीर न जानी हो ।
ज्यू चातक घनकू रटै मछली जिमि पानी हो ।
मिरा ब्याकुल बिरहणी सुध बुध बिसरानी हो ।
