नानक ३९६२ ते ३९६४
3962.
नानक ३९६२ ते ३९६४
आलख निरंजन नानक आया । नेकीकरना आच्छा है ॥१॥ फेक पैसा फेक यारो । एकपैसा फेक॥ध्रु.॥माया झोली निरगुण सैली । नाममालाजपता है ॥२॥ समकी टोपी दमकी कफनी । त्रिगुण बभूत चढाई है ॥३॥ जीवशीवदोनो कुंडलपेन्हे । अनुहत टीपरी बजावत है ॥४॥ कामक्रोधकीगर्दन मारी । बोध खंडा झळकत है ॥५॥ प्रेम कटारीलियी हातमो । लवंडी माया डरती है ॥६॥ वैराग्यभाला पडे उजाला । संसारमों तो फत्तर है ॥७॥ तो भवनमांसौदा बेचे । आशा मनशा धरता है ॥८॥ फेर चौऱ्याऐंशी आयी यारो । मुपर जुता खाताहै । ९॥चारों बरनो में ब्राह्मण बडा । घर घर कथाकरता है ॥१०॥ नाम बेचकर दाम लेते । उसकीकरनी हराम है॥११॥फकीर होकर फीकीरकरिता । उसका मूं काला है ॥१२॥ नाथपंथकीमुद्रा डाली । जगमें सिंगी बजावत है॥१३॥ सिंगीनादकुं औरत भुला । वोबी लवंडा झुटा है ॥१४॥ संन्यास लिया आशा बढ्या । मीठा खाना मंगताहै ॥१५॥ भूल गया अल्लाका नाम यारो । ज्यमकासोटा बजाता है॥१६॥ शेटे सावकार मालखजीना । उनमें मगन रेहेता है ॥१७॥ जोरूलडकेकोई नही साती । आखर मुमे मठ्ठी है ।॥१८॥ मानभाव बनेके काला पैने । छानकर पानी पीताहै ॥१९॥ आत्मध्यानकु चोर लुटत हैं । वो बी सच्चागध्दा है ॥२०॥ शंख बजावत जंगम आया । घरघर लेकर फीरता है ॥२१॥ पेटखातर शिवकू बेचे । वोबी लवंडा कुत्ता है ॥२२॥ गोसावी बड़ा भगवाजावे । जटा बढाकर रहेता है॥२३॥साहा चोरकूजगा देकर । उसमें फंदमें फिरतर है ।॥२४॥ साहाफेकेसो सादु बनेगा । नही तोयारोगव्हार है ॥२५॥ फेक आशा फेक मनशा । निंदा फेके सो जोगीहै ॥२६॥ परधन फेक दुजी औरत फेक । न फेकेसो चांडाल है ॥२७॥ दंभमान फेक । मीपण फेकन फेके सो नकटा आंधा है ॥२८॥ साही शास्त्रअठरा पुराण । चारो वेद पढता है॥२९ । माबापतो कासीतीरथ । उसकु गाली देता है ॥३०॥ साधुसंत घरकु आये । उसकू तेडा बोलताहै॥३१॥दिवाना उनका बापयारो । हात जोडकररहेता हैं॥३२॥नाम अल्लाका कथा सुन्ने की । उव्हां मुरगी का सोता है॥३३॥काम का कुत्ताकसबीन घरमें । सारी रात दिन जागत रै॥३४॥इस दुनिया में आया बंदे । अल्ला नाम का सौदाहै॥३५॥एक दिन आना एक दिनजाना । दो दिनका सब बजार है॥३६॥इस नमगरी में सेंटेसावकार । बड़े मतलबी रहते है॥३७॥नामकीजोडी करले यारो । चौऱ्याऐंशी बेडीतुटती है॥३८॥तेरे नगरी में नानक आया । पैसा टक्का कुच मंगतानही है॥३९॥भक्ती रोटी भावका सालना देनामेरे कू सच्चा है । ॥४०॥एका जनार्दनी शाही हमारा । नानक उनका बंदा है॥४१॥मोक्ष निशानी लियीहातमों । वैकुंठधाम पढता है॥४२॥
