ऐसा कलियुगींचा आचार|
1834.
ऐसा कलियुगींचा आचार| क्रियाभ्रष्ट जाले नरः ॥१॥
मंचकावरी बैसे राणी | माता वाहतसे पाणी ॥२॥
स्त्रियेसी अलंकार भूषण | माता वळितसे शेण ॥३॥
स्त्रियेसि पाटावाची साडी | माता नेसे चिध्या लुगड़ी ॥४॥
सासुसासन्या योग्य मान | मायबापा न घाली अन्न ॥५॥
साली सासवा आवडती | बहिण भावा तोंडी माती ॥६॥
स्त्रियेसी एकांत गोडी | मातेसी म्हणे रांड वेडी ॥७॥
म्हणे विष्णुदास नामा | ऐसा कलियुगींचा महिमा ॥८॥
