जैसी भुखे प्रति अनाज
८०.
जैसी भुखे प्रति अनाज । तृखावत जलसे ती काज ॥१॥
जैसी मूढ कुटुंब परायण । तैसी नामे प्रीत नारायण ॥२॥
जैसी पर पुरखा रत नारी ॥३॥
लोभी नर धनका हितकारी । कामी पुरखा कामिनी प्यारी । ऐसी नामी प्रीत मुरारी ॥४॥
साई प्रीत जे आभलाये । गुरु प्रसादी दुधाजाये ॥५॥
कबहून तुटस रह्या समाये । नामे चितलाया सचनाये ॥६॥
जैसी प्रीत बारक आरमाता । तैसा हेरसती मनराता ॥७॥
परनवे नामदेव लागी प्रीत । गोविंद बसे हमारे चित्त ॥८॥
