चितवौ जी मोरी ओर,
27.
चितवौ जी मोरी ओर,
चितवौ जी मोरी ओर ।
मै तो थारी बाट निहारूँ,
आवो नंदकिशोर ।
दीन दुखी की लाज राखजो,
तुम बिन कौन सहोर ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
चरणन की मै चोर ।
27.
चितवौ जी मोरी ओर,
चितवौ जी मोरी ओर ।
मै तो थारी बाट निहारूँ,
आवो नंदकिशोर ।
दीन दुखी की लाज राखजो,
तुम बिन कौन सहोर ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर,
चरणन की मै चोर ।