सुनो कहत है श्याम सु
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सुनो कहत है श्याम सुजानो पुण्य बिना नहीं कोई ।
जिसके पल्लो जप तप दान पावे दरसन वोही ॥१॥
तुम सब बात सुनोजी चित्तकु ठोर धरोजी ।
हरिके आयो पेटे येही बात कहोजी ॥२॥
फूल बिना फल, जल बिना अंकुर, बिनपुरूष नहीं छाया ।
जलबिन कमलिनि, रविबिन तेज, आगे तहॉं सब आया ॥३॥
तरू तहॉं बीज, बीज तहॉं तरू ।
है दीपके पास प्रकाश ।
नर तॉंही नारी, जल तॉंही थल है, पुण्य ताहॉं अविनाश ॥४॥
बहेणि कहे जिसकू हरि आवे वोहि है पुण्य की रास ।
शांती क्षमा उसके घर सोवे सबही संपति दास ॥५॥
