॥ केदार नाथ जी की आर
4.
॥ केदार नाथ जी की आरती ४ ॥
जय केदार उदार शंकर,
मन भयंकर दु:ख हरम |
गौरी गणपति स्कंद नंदी,
श्री केदार नमाम्यहम |
शैल सुंदर अति हिमालय,
शुभ्र मंदिर सुंदरम |
निकट मंदाकिनी सरस्वती,
जय केदार नमाम्यहम |
उदक कुंण्ड है अधम पावन,
रेतस कुंड मनोहरम |
हंस कुंण्ड समीप सुंदर,
जय केदार नमाम्यहम |
अन्नपूर्णा सह अपर्णा,
काल भैरव शोभितम |
पंच पांडव द्रोपदी सह,
जय केदार नमाम्यहम |
शिव दिगम्बर भस्म धारी,
अर्द्ध चंद्र विभूषितम |
शीश गंगा कण्ड फणिपति,
जय केदार नमाम्यहम |
कर त्रिशूल विशाल डमरु,
ज्ञान गान विशारदम |
मदमहेश्वर तुंग ईश्वर,
रुद्र कल्प महेश्वरम |
पंच धन्य विशाल आलय,
जय केदार नमाम्यहम |
नाथ पावन हे विशालम,
पुण्यपप्रद हर दर्शनम |
जय केदार उदार शंकर
पाप ताप नमाम्यहम |
