वारकरी रोजनिशी

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वारकरी रोजनिशी › 4. संत नामदेव › 1. संत नामदेव अभंग गाथा › २. संत नामदेव गाथा :- भाग २ › 153. श्री सोपानदेवांचे नमन

नमो ज्योतिर्मय ब्रह्

🙏 4. संत नामदेव · ABH-081560 · अभंग क्र. ११३७

1137.
नमो ज्योतिर्मय ब्रह्मा | आनंद ईश्वर पुरातन | नमो नारायणा कमळ-कोंदणा | नमो नमो स्वामिया | १॥ नमो सद्गुरु निवृत्ति | नमो रखुमाईच्या पति | नमो ज्ञानमूर्ती | अगम्य पुरुषा ॥२॥
नमो भक्ति मुक्ति चेतन्य माया | नमो कर्ता हर्ता काया | नमो आदि पुरातन पाया | परब्रह्मा ॥३॥
नमो विराट पुरुषा पुरातना | नमो जगज्जीवना' करुणाघना | चराचरपालका आनंदघना | अंगिकारी नमना माझिया ॥४॥
नमो ब्रह्मांडव्यापका | नमो गुणातीता मायांतका | चुकवी जन्ममरण एका | तारी विदवकृपेने ॥५॥
नमो जळस्थळ रक्षिता | आदी अवसानी तारिता | नमो रोमारोम अव्यक्ता | नमो नमो दीनबंधू ॥६॥
नमो विराट महदब्रह्मा | निष्कलंक परब्रह्मा | योगियांच्या सुखधामा | नमो नमो दयाळा ॥७॥
औट हाती ध्वनी | नमो नमो अंतःकरणी |नमो नमो सत्रावी त्रिवेणी | त्रिपुटी जेर्थे ॥८॥
|नमो विटेवरी सदटा | नमो वैकुठीचिये पीठा |आदी अंती एकटा | नमो आदिपुरुषा ॥९॥
आदी अंती शेवटी | सहस्रदळी गुह्य पिठी |नमो उघडी दृष्टि | स्वरूपी तुझ्या ॥१०॥
नमो पायी पडली मिठी | नमो बांधिली हृदयी गांठी | तुझे स्वरूप हृदयसंपुष्टी | धरून ठेविले स्वामिया ॥११॥
नमो गेले आले | नमो जाले ते जाले |नमो सांभाळुनी तुझे | ठेवी आम्हा ॥१२॥
वटेश्वरांचे नमन.

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