प्रगट भयो भगवान॥धृ०॥
133.
प्रगट भयो भगवान॥धृ०॥
नंदाजीके घर नौबद बाजे । टाळ मृदंग और तान॥१॥
सबही राजे मिलन आवे । छांड दिये अभिमान॥२॥
मिराके प्रभु गिरिधर नागर । निशिदिनी धरिजे ध्यान॥३॥
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प्रगट भयो भगवान॥धृ०॥
नंदाजीके घर नौबद बाजे । टाळ मृदंग और तान॥१॥
सबही राजे मिलन आवे । छांड दिये अभिमान॥२॥
मिराके प्रभु गिरिधर नागर । निशिदिनी धरिजे ध्यान॥३॥