चुराचुराकर माखन खाया
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चुराचुराकर माखन खाया । गौलनका नन्द कुमर कन्हैया ॥१॥
काहे बराई दिखावत मोही । जानतहु प्रभुपन तेरा सबही ॥२॥
और बात सुन उखलसुगला । बंधलिया आपना तू गोपाला ॥३॥
फ़ेरत बन बन गाऊ धरावत । कहे तुकयाबन्धु लकरी ले ले हात ॥४॥
काल्याचे अभंग समाप्त
गौळणी पहा.
