तुमरे दरस बिन बावरी
52.
तुमरे दरस बिन बावरी ।
दूर नगरी, बड़ी दूर नगरी-नगरी
कैसे मै तेरी गोकुल नगरी
दूर नगरी बड़ी दूर नगरी
रात को कान्हा डर माही लागे,
दिन को तो देखे सारी नगरी । दूर नगरी...
सखी संग कान्हा शर्म मोहे लागे,
अकेली तो भूल जाऊँ तेरी डगरी । दूर नगरी...
धीरे-धीरे चलूँ तो कमर मोरी लचके
झटपट चलूँ तो छलकाए गगरी । दूर नगरी...
मिरा कहे प्रभु गिरधर नागर,
तुमरे दरस बिन मै तो हो गई बावरी । दूर नगरी...
