हरि बोलो भाई हरि बोल
6.
हरि बोलो भाई हरि बोलो भाई । हरि ना बोले वांकु राम दुर्हाई ॥१॥
काहेकु पढता खिन खिन गीता । हरिनाम लिया सो सब कुछ होता ॥२॥
मेरा मेरा कर कर क्या फल पाया । हरिके भजन बिना झुठ गमाया ॥३॥
कहत कबीर हरिगुन गाना । गावत गाचत वैकुंठ जाना ॥४॥
