प्रभुजी मै अरज करु छ
320.
प्रभुजी मै अरज करु छू म्हारो बेड़ो लगाज्यो पार॥
इण भव मे मै दुख बहु पायो संसा-सोग निवार ।
अष्ट करम की तलब लगी है दूर करो दुख-भार॥
यो संसार सब बह्यो जात है लख चौरासी री धार ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर आवागमन निवार॥
320.
प्रभुजी मै अरज करु छू म्हारो बेड़ो लगाज्यो पार॥
इण भव मे मै दुख बहु पायो संसा-सोग निवार ।
अष्ट करम की तलब लगी है दूर करो दुख-भार॥
यो संसार सब बह्यो जात है लख चौरासी री धार ।
मिरा के प्रभु गिरधर नागर आवागमन निवार॥