पतीया मै कैशी लीखूं,
189.
पतीया मै कैशी लीखूं, लीखये न जातरे॥धृ०॥
कलम धरत मेरा कर कांपत । नयनमो रड छायो॥१॥
हमारी बीपत उद्धव देखी जात है । हरीसो कहू वो जानत है॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमल रहो छाये॥३॥
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पतीया मै कैशी लीखूं, लीखये न जातरे॥धृ०॥
कलम धरत मेरा कर कांपत । नयनमो रड छायो॥१॥
हमारी बीपत उद्धव देखी जात है । हरीसो कहू वो जानत है॥२॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । चरणकमल रहो छाये॥३॥