जशोदा मैया मै नही दध
84.
जशोदा मैया मै नही दधी खायो॥धृ०॥
प्रात समये गौबनके पांछे । मधुबन मोहे पठायो॥१॥
सारे दिन बन्सी बन भटके । तोरे आगे आयो॥२॥
ले ले अपनी लकुटी कमलिया । बहुतही नाच नचायो॥३॥
तुम तो धोठा पावनको छोटा । ये बीज कैसो पायो॥४॥
ग्वाल बाल सब द्वारे ठाडे है । माखन मुख लपटायो॥५॥
मिरा कहे प्रभु गिरिधर नागर । जशोमती कंठ लगायो॥६॥
